मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | हर हिंदू मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि आती है। यह भगवान शिव की अत्यंत प्रिय मानी गई है। ऐसे में मासिक शिवरात्रि का व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भी रखा जाता है, जो भगवान शिव को अति प्रिय है।
मान्यता के अनुसार इस दिन विधि-विधान से मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने वालें को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और उनकी समस्त मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं। साथ ही भगवान शिव के आशीर्वाद से भक्तों व उनके परिवार को जीवन में आरोग्य, धन, दौलत, सुख आदि की प्राप्ति होती है।
मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इस दिन पहले माता पार्वती की पूजा की जानी चाहिए, क्योंकि माता पर्वती की पूजा पहले होने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते है।
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रविवार 30 जनवरी की शाम 05 बजकर 28 मिनट से शुरु होगी जो सोमवार, 31 जनवरी की दोपहर 02 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। ज्ञात हो कि मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri Puja) की रात के समय पूजा की जाती है। ऐसे में चतुर्दशी तिथि की रात्रि रविवार, 30 जनवरी को रहेगी। जबकि मासिक शिवरात्रि का व्रत भी 30 जनवरी के दिन ही रखा जाएगा। यह मासिक शिवरात्रि साल 2022 की दूसरी मासिक शिवरात्रि होगी, क्योंकि साल 2022 की पहली शिवरात्रि 1 जनवरी 2022 को थी।
यूं तो हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ माह में मुख्य रूप से भगवान श्रीहरि विष्णु के साथ ही सूर्यदेव की पूजा होती है। मान्यता है कि इस माह में भगवान माधव की पूजा करने से उपासक को राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। इस माह में गुप्त नवरात्रि होती है, माता दुर्गा के 10 महारुपों अर्थात दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। इसके अलावा यह माह भगवान शिव की पूजा के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है।
मासिक शिवरात्रि का व्रत के संबंध में मान्यता है कि इस दिन शिव पूजा करने से दुखों से छुटकारा मिलता है, साथ ही भगवान शिव की कृपा से व्यक्ति निरोगी रहता है। भगवान शिव अपने भक्तों को सुख, संतान, आरोग्य, साहस आदि प्रदान करते हैं।
अत्यंत जल्दी प्रसन्न होने और भोले होने के कारण ही भगवान शिव का एक नाम भोलेनाथ भी हैं और वे तो एक लोटे जल से तक भक्तों पर प्रसन्न हो जाते हैं, अत: कहा जाता है कि भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए नियमित रूप से शिवलिंग पर जल अर्पित करना चाहिए।