मुंबई | न्यूज़ डेस्क | काफी समय से यूजर्स को 5G इंटरनेट का इंतजार था और अमेरिका में अब इसकी शुरुआत हो रही है। 5G कनेक्टिविटी से यूजर्स को सुपरफास्ट इंटरनेट का मजा तो मिलेगा, लेकिन इससे जुड़े एक खतरे ने यात्रियों और दुनियाभर की एयरलाइन कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। एयर इंडिया ने लगातार दूसरे दिन भी भारत से अमेरिका और अमेरिका से भारत की 8 उड़ानों को कैंसल कर दिया है।
अमेरिकी एयरपोर्ट्स के पास शुरू हो रहे 5G नेटवर्क से जुड़े खतरे को देखते हुए समेत कई और कंपनियों ने पहले ही अमेरिका के लिए अपनी कुछ उड़ानों को रद्द कर चुकी हैं। यूएसए में एविएशन इंडस्ट्री इसका काफी विरोध कर रही है। इसकी वजह से वेरिजोन और एटीएंडटी ने एयरपोर्ट के आसपास 5G सेवाओं की लॉन्चिंग को फिलहाल टाल दिया है। आइए जानते हैं कि 5G नेटवर्क एयरक्राफ्ट्स के लिए क्यों खतरा साबित हो सकता है।
एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी Boeing ने अपनी जांच में पाया कि 5G नेटवर्क बोइंग 777 एयरक्राफ्ट के फ्लाइट टेलिमेट्री में दिक्कत पैदा कर सकता है। फ्लाइट टेलिमेट्री में गड़बड़ी के कारण विमान का ऑटोमैटिक सिस्टम ऊंचाई का सही अंदाजा नहीं लगा पाता। ऊंचाई की सही जानकारी न होने पर किसी भी पायलट के लिए विमान को लैंड कराना काफी जोखिम भरा हो सकता है।
यही कारण है कि एयर इंडिया समेत दुनियाभर की कई एयरलाइन्स ने अमेरिका के लिए उड़ान भरने वाले बोइंग 777 एयरक्राफ्ट को फिलहाल ग्राउंडेड रखने का फैसला किया है। एयरलाइन कंपनियों ने उन रूट्स पर उड़ान भरने वाले बोइंग 777 एयरक्राफ्ट्स को ही ग्राउंडेड रखा है, जिन रूट्स पर अमेरिका में 5G नेटवर्क्स को शुरू किया जा रहा है।
अमेरिका ने 5G के लिए मिड-रेंज बैंडविड्थ (3.7-3.9 GHz) की फ्रीक्वेंसी की नीलामी की थी, विमान के अल्टीमीटर रेडियो सिग्नल भी लगभग इसी रेंज वाली फ्रीक्वेंसी (4.2-4.4 GHz) का इस्तेमाल करते हैं। इससे अल्टीमीटर ठीक से काम नहीं कर पाता। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने भी कहा कि C-बैंड 5G कुछ एयरक्राफ्ट्स में लगे रेडियो वेव रेडार ऑल्टिमीटर में गड़बड़ी पैदा कर सकता है और इससे एयरक्राफ्ट और यात्रियों की सेफ्टी को लेकर चिंता काफी बढ़ जाती है। FAA ने कहा कि किसी भी एयरक्राफ्ट के सही ऑपरेशन के लिए रेडार ऑल्टिमीटर का सही ढंग से काम करना बेहद जरूरी है।
यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल विमानों को उन इलाकों में रेडियो ऑल्टिमीटर इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होगी जहां पर 5G के कारण रेडियो वेव्स में ज्यादा बाधा आ रही हो। हालांकि, इससे कुछ विमानों को कम विजिबिलिटी में लैंडिंग की समस्या जरूर आ सकती है। अमेरिकी एयरलाइन कंपनियों का कहना है कि इस परेशानी के कारण खराब मौसम में एक हजार से ज्यादा उड़ानों को कैंसल या डीले करना पड़ सकता है। साथ ही कंपनियों ने यह भी कहा कि 5G के कारण आने वाली इस दिक्कत से बहुत सारे एयरक्राफ्ट काफी हद तक किसी काम के नहीं रहेंगे।
मामले से निपटने में लगीं हैं अमेरिकी एजेंसियां
फेडरल एविएशन ऐडमिनिस्ट्रेशन ने 5G को देखते हुए विमानों के सुरक्षित संचालन के लिए कुछ जरूरी कदम उठाए हैं। इसके लिए FAA ने 50 एयरपोर्ट्स के पास बफर जोन बनाया है। इन बफर जोन में 5G नेटवर्क की सर्विसेज को काफी सीमित रखा जाएगा। इसके अलावा अब ऐसे ऑल्टिमीटर्स की भी तलाश की जा रही है, जो 5G के बीच बिना किसी परेशानी के काम कर सकें।
साथ ही FAA ने उन एयरपोर्ट्स की भी पहचान की है, जहां विमानों को सुरक्षित लैंड कराने के लिए रेडियो ऑल्टिमीटर्स की बजाय जीपीएस का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, FAA के इन उपायों से एयरलाइन कंपनियां पूरी तरह सहमत नहीं हैं और उनकी मांग है कि प्रभावित एयरपोर्ट्स के दो मील के दायरे में 5G नेटवर्क पर रोक लगाई जाए।
5G नेटवर्क का इंसानों पर क्या असर होता है, इसे लेकर बीते कुछ सालों में काफी रिसर्च हुई है। साल 2017 में WHO ने अपनी एक रिसर्च के आधार पर कहा था कि 1.8 से 2.2GHz की फ्रीक्वेंसी से इंसानों में टिशू हीटिंग की समस्या आ सकती है। इसके अलावा 5G नेटवर्क के संपर्क में रहने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने का भी खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, 5G से होने वाले नुकसान के बारे में अभी कोई साइंटिफिक स्टडी सामने नहीं आई है।