मुंबई | न्यूज़ डेस्क | हाल ही में भारतीय थल सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा था कि भारतीय सेना सियाचिन ग्लेशियर से हटने के खिलाफ नहीं है। लेकिन इसके लिए पहले पाकिस्तान को पहल करनी होगी और पाकिस्तान को ऐक्चुअल ग्राउंड पोजिशन लाइन (AGPL) को स्वीकार करना होगा।
सियाचिन को लेकर पाकिस्तान के इरादे ठीक नहीं हैं। पाकिस्तान और चीन अब कश्मीर में यारकंद को शक्सगाम घाटी के जरिए मुजफ्फराबाद से जोड़ने की जोड़ने की तैयारी में है। ऐसे में भारत के सुरक्षा योजनाकारों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 5193 वर्ग किलोमीटर के शक्सगाम घाटी को पाकिस्तान ने 1963 में अवैध रूप से चीन को सौंप दिया था। बता दें कि शक्सगाम घाटी ट्रांस-काराकोरम रेंज वाटरशेड में स्थित है।
भारत को दो मोर्चे से खतरा
मैप को देखने पर यह साफ होता है कि रिमो ग्लेशियर, टेराम शहर ग्लेशियर और सियाचिन ग्लेशियर भारतीय केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के भीतर स्थित हैं। इन ग्लेशियरों के पास के क्षेत्र जैसे कि शक्सगाम घाटी और यारकंद जैसे घाटी चीनी सेना के प्रभुत्व वाले क्षेत्र हैं और चीनी सेना का आक्रामक उल्लंघनों का इतिहास रहा है। ऐसे में भारतीय सेना को दो मोर्चे से खतरा है।
भारतीय सेना साल्टोरो रिज को नियंत्रित करती है जो 1984 के ऑपरेशन मेघदूत के बाद से सियाचिन ग्लेशियर में एंट्री देती है। सियाचिन ग्लेशियर पूर्वी काराकोरम रेंज में स्थित है जो एनजे 9842 के उत्तर पूर्व में है, जहां भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा समाप्त होती है।
तेराम शहर और रिमो ग्लेशियर सियाचिन ग्लेशियर के पूर्व और शक्सगाम और