January 16, 2022

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ना क्वारंटाइन, ना ही लॉकडाउन : कोरोना वायरस के साथ जीने को तैयार है यह देश




मुंबई | न्यूज़ डेस्क | एक तरफ जहां पूरी दुनिया कोरोना से बचाव के लिए क्वारंटाइन नियमों के पालन पर जोर दे रही है, वहीं दक्षिण अफ्रीका कोरोना से जंग में बदलाव की नई राह पर चल रहा है। बीते दिसंबर के अंतिम दिनों से दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने कोरोना संक्रमितों के संपर्क में आए व्यक्तियों का पता लगाने और उन्हें क्वारंटाइन करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। साथ ही सरकार लॉकडाउन के भी पक्ष में नहीं है।

दक्षिण अफ़्रीकी सरकार ने कोरोना महामारी पर नज़र रखते हुए अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने का फैसला किया है। क्वारंटाइन नियम अपनाने के बजाय सरकार का ज्यादा जोर स्वास्थ्य प्रणाली सुधारने पर है। सरकार का मानना है कि अर्थव्यवस्था, आजीविका और समाज के अन्य पहलुओं पर प्रतिबंधों का अप्रत्यक्ष रूप से सही, लेकिन हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

बजाय किसी प्रतिबंध के वायरस के साथ जीने के तरीकों की तलाश करना ज्यादा जरूरी है। यह दक्षिण अफ्रीका जैसे संसाधनविहीन देशों के लिए खास तौर पर प्रासंगिक है। इसलिए सरकार विश्व स्तर पर चल रही उन नीतियों (कोरोना के केस में) का आंख बंद करके पालन नहीं करेगी, जो स्थानीय स्तर पर संभव नहीं हैं और जिससे नाममात्र का लाभ प्राप्त होता है।

जनसंख्या प्रतिरक्षा: नए दृष्टिकोण का मुख्य तत्व उच्च स्तर की जनसंख्या प्रतिरक्षा से है। दक्षिण अफ्रीका के आर्थिक केंद्र गौतेंग में ओमीक्रोन लहर की शुरुआत से ठीक पहले किए गए एक सीरो-सर्वेक्षण ने संकेत दिया कि पहली तीन लहरों के दौरान 72% लोग संक्रमित हुए थे। कोविड​​​​-19 में सीरो-पॉजिटिविटी 79% और 93% थी। सीरो-सर्वेक्षण के आंकड़ों से पता चलता है कि देश में कोरोना के खिलाफ प्रतिरक्षा पहली तीन लहर के दौरान और टीकाकरण के आगमन से पहले प्राकृतिक संक्रमण के माध्यम से विकसित हुई।

बूस्टर खुराक: एंटीबॉडी की उपस्थिति अंतर्निहित टी-सेल प्रतिरक्षा के लिए एक सुरक्षा कवच है, जो गंभीर संक्रमण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। टी-सेल प्रतिरक्षा कम से कम अगले 6-12 महीनों के लिए बने रहना चाहिए। इसके लिए उच्च जोखिम वाले समूहों के लिए बूस्टर खुराक सहित टीकों की अधिक मात्रा सुनिश्चित करने के अभियान को जारी रखने की आवश्यकता है।

हाथ धोने और सतही थर्मल स्क्रीनिंग में ढील देने की जरूरत: गैर-औषधीय हस्तक्षेपों में भी धीरे-धीरे ढील देने की गुंजाइश है। विशेष रूप से हाथ की स्वच्छता और सतही थर्मल स्क्रीनिंग को समाप्त कर दिया जाना चाहिए। बाहरी खेल आयोजनों में उपस्थिति की अनुमति न देने का कोई कारण नहीं है। साथ ही सरकार को खराब हवादार इनडोर स्थानों में पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखना चाहिए।

अस्पताल में भर्ती होने से बचाने का लक्ष्य: सरकार का लक्ष्य अस्पताल में भर्ती होने से बचाने और मृत्यु को कम करना है। दक्षिण अफ्रीका में ओमीक्रोन लहर में मृत्यु दर डेल्टा की तुलना में लगभग दसवां हिस्सा होने की राह पर है। इसका मतलब है कि यह संभवतः मौसमी इन्फ्लूएंजा प्री-कोविड से होने वाली मौतों (प्रति वर्ष 10,000 से 11,000) के बराबर है। इस मृत्यु दर को अन्य रोकी जा सकने वाली मौतों के सापेक्ष भी माना जाना चाहिए। टीबी एक उदाहरण है, जिसके कारण 2019 में दक्षिण अफ्रीका में 58,000 लोगों की मौत होने का अनुमान है।

टीकाकरण पर जोर: यह कहना असंभव है कि समय के साथ भविष्य के वेरिएंट की विशेषताएं क्या होंगी। लेकिन, दक्षिण अफ्रीका में ओमीक्रोन वेरिएंट फैलने के दौरान प्राप्त अनुभव से सीख ले सकते हैं। विशेष रूप से यदि टीकाकरण अभियान 90 फीसदी तक बढ़ाया जाय (विशेष रूप से 50 वर्ष आयु वर्ग में) तो संक्रमण को कम करने में बहुत मदद मिलेगी।





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