मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | ये साल शिव पूजा के साथ खत्म हो रहा है। 31 दिसंबर, शुक्रवार को त्रयोदशी तिथि होने से शुक्र प्रदोष का संयोग बनेगा। प्रदोष व्रत में भगवान शिव-पार्वती की पूजा करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है और मनोकामना भी पूरी होती है। साल के आखिरी दिन बन रहे शुक्र प्रदोष के संयोग से सौभाग्य और मनोकामना पूरी होती है।
शिव-पार्वती पूजा का दिन
हर महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन प्रदोष व्रत किया जाता है। प्रदोष व्रत भगवान शिव-पार्वती की पूजा करने का शुभ दिन है। इस व्रत के बारे में ऐसी मान्यता है कि जो भी पूरी श्रद्धा से इस व्रत को करता है और पूरे विधि-विधान से भगवान शिव-पार्वती की पूजा करता है, उस पर भगवान शिव का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है। बुधवार को ये व्रत होने से इसे बुध प्रदोष कहा जाएगा।
प्रदोष व्रत का महत्व
स्कंदपुराण में इस व्रत के बारे में ज़िक्र करते हुए लिखा गया है कि इस व्रत को किसी भी उम्र का व्यक्ति रख सकता है और इस व्रत को दो तरह से रखे जाने का प्रावधान है। कुछ लोग इस व्रत को सूर्योदय के साथ ही शुरू कर के सूर्यास्त तक रखते हैं और शाम को भगवान शिव की पूजा के बाद शाम को अपना व्रत खोल लेते हैं, तो वहीं कुछ लोग इस दिन 24 घंटे व्रत को रखते हैं और रात में जागरण करके भगवान शिव की पूजा करते हैं और अगले दिन व्रत खोलते हैं।
शुक्र प्रदोष महत्व
शिवपुराण के अनुसार प्रदोष व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वार के अनुसार अलग-अलग दिन त्रयोदशी तिथि का संयोग बनने पर उसके फल का महत्व भी बदल जाता है। शुक्रवार को त्रयोदशी तिथि होने से शुक्र प्रदोष का योग बनता है।
इस संयोग में भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से हर तरह की परेशानियां दूर हो जाती है। शुक्रवार को प्रदोष व्रत रखने से नौकरी और बिजनेस में सफलता मिलती है। इस दिन व्रत और शिव-पार्वती पूजा से समृद्धि आती है। सौभाग्य और दांपत्य जीवन में भी सुख बढ़ता है।