मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जो सभी देवी-देवतों में प्रथम पूजनीय है की पूजा की जाती है। 2021 का अंतिम संकष्टी चतुर्थी 22 दिसंबर को मनाई जायेगी। 22 दिसंबर 2021 का दिन बुधवार होने के कारण इसका महत्त्व और भी ज़्यादा बढ़ गया है क्योंकि बुधवार का दिन गणपति जी को समर्पित होता है। इसदिन जो भी भक्त सच्चे मन से गणेशजी की पूजा अर्चना करेंगे, विघ्नहर्ता गणेश उनके सारे दुःख, कष्ट और समस्याओ का निवारण करेंगे।
संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए उपवास रखा जाता है और चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत का पारण करना चाहिए। संकष्टी चतुर्थी के दिन माँ अपने बच्चो के उज्वल भविष्य और लम्बी आयु के लिए व्रत रखती है।
गणेश जी को बुद्धि का दाता कहा गया है इसलिए अगर सच्चे मन से पूजा अर्चना की जाए तो आपके बुद्धि में भी विकास हो सकता है। संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में जानते है।
- संकष्टी चतुर्थी पूजन मुहूर्त
- चतुर्थी तिथि: 22 दिसंबर 2021, बुधवार
- पूजन मुहूर्त: रात्रि 08:15 से रात्रि 09:15 तक (अमृत काल)
- चंद्र दर्शन मुहूर्त: रात्रि 08:30 से रात्रि 09:30 तक
संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
1- प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठ जाएं।
2- स्नान करने के बाद साफ़ और सुथरे लाल वस्त्र को पहने। संकष्टी चतुर्थी के दिन लाल वस्त्र को पहनना शास्त्रो के अनुसार शुभ माना जाता है।
3- अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रख कर गणेश जी पूजा अर्चना करें।
4- भगवान् गणेश की मूर्ति को फूलों से अच्छी तरह से सजा ले।
5- तिल, गुड़, लड्डू, फूल , ताम्बे के बर्तन (कलश)में पानी, धूप, चन्दन और केला या नारियल जरूर रखे।
6- मां दुर्गा की मूर्ति अपने पास जरूर रखें।
7- गणेश जी को रोली लगाने के बाद जल और पुष्प अर्पित करें।
8- भगवान गणेश को तिल के लड्डू और मोदक का भोग अर्पित करें।
9- शाम के समय चन्द्रमा के उदय से पहले गणेश जी की पूजा करके संकष्टी व्रत कथा पढ़ें।
10- पूजा समाप्त होने के बाद अपने परिवार जानो को प्रसाद वितरित करें।
11 . रात को चांद ( रात्रि 08:30 से रात्रि 09:30 ) देखने के बाद अपने व्रत को खोले।
संकष्टी चतुर्थी के पूजा में इस मंत्र का करें जाप करके भगवान गणेश जी प्रसन्न करके अपने दुःख और समस्या को दूर करने का निवेदन करें।
गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्।
उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्।।