श्रीगंगानगर | न्यूज़ डेस्क | एक तरफ रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगाता गुरूद्वारा धन धन बाबा दीप सिंह, उसके ऊपर बने विशाल हॉल में चल रहा कीर्तन दरबार में प्रख्यात कथावाचक ज्ञानी पिन्दर पाल सिंह को सुनने के लिए उमड़ी हज़ारों की भीड़, बाहर सिखों के शौर्य गाथा को दर्शाने वाली सजाई गई आठ झांकियों को देखकर भावुक होती संगत और फिर समापन हुआ, तो शुरू हुआ गुरू का अटूट लंगर।
यही वे दृश्य थे, जो मंगलवार की शाम से लेकर देर रात तक पदमपुर रोड स्थित गुरूद्वारा धन धन बाबा दीप सिंह जी शहीद में नजर आये, जहां श्री गुरू तेग बहादुर जी के चार सौ साला प्रकाश पर्व को समर्पित महान कथा कीर्तन के दरबार में अंतिम दिन विशेष तौर पर प्रख्यात कथा वाचक भाई पिन्दरपाल सिंह ने कथा-कीर्तन से संगत को निहाल किया। इस दौरान जब उन्होंने श्री गुरू तेग बहादुर की जीवनी पर प्रकाश डालते जब यह बताया कि किस तरह से उन्होंने दूसरे धर्म की आस्था की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि उन्होंने बुराई का त्याग कर काम, क्रोध, लोभ मोह और अहंकार पर विजय पाने का संदेश दिया था। ज्ञानी पिंदर पाल जी के शब्दों ने संगत को बांध सा दिया।उनके मुखारबिंद से शब्द निकलते गए और संगत के मन मस्तिष्क पर जैसे हर दृश्य उभरते चले गए। मन्त्र मुग्ध संगत इतिहास,सिख सिद्धात और रूहानियत के भंवर में बहती चली गई। ज्ञानी जी ने उन व्यक्तियों पर तंज कसते हुए कहा कि जो सोशल मीडिया पर डालते है कि सिक्खों ने गजनवी के बाज़ार में टके टके पर बिक रही हिंदुयों की बहु बेटियों को बचाया। उन्होंने कहा कि बेटियां सभी की सांझी होती है।
हमारे लिए वो किसी दूसरे की बेटी नही बल्कि ऐसी बाते करके हम सिख सिद्धातों व सिख के उच्चे सुच्चे किरदार को छोटा करते है।गुरबाणी कहती है कि "वेख पराईयां चंगीयां मावां भैना धीयां जाण"। वो हम सब की मां,बहन और बेटियां है।अहसान नही बल्कि हमारे फ़र्ज़ था और है।उन्होंने कहा कि देश,कौम,समाज के लिए कुछ कर गुजरना यहां तक कि प्राण न्यौछावर करना ही सही मायने में जीवन है।और इन शहादतों के लिए इबादत नींव है और शहादत शिखर है।
कथा कीर्तन के बाद भाई पिन्दरपाल सिंह को गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी की तरफ से हरप्रीत सिंह बबलू, सतनाम सिहं लाडा, सिख स्टूडैंट फैडरेशन राजस्थान, गुरमत सिद्धांत प्रचारक संत समाज राजस्थान, करतार फाउंडेशन, श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिले की संगतों ने उन्हें सरोपा भेंट कर सम्मानित किया। इसके बाद गुरू का अटूट लंगर चला। कीर्तन दरबार के दौरान संगत के साथ-साथ सेवादारों में जबर्दस्त उत्साह देखने को मिला। किसी ने जोड़ों की सेवा की, तो किसी ने लंगर बनाने से लेकर वितरण करने और फिर बरतन धोने तक की जिम्मेदारी निभाई |
विशाल हॉल भी पड़ गया छोटा
कीर्तन दरबार में श्रीगंगानगर ही नहीं, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में संगत पहुंची। कीर्तन दरबार गुरूद्वारा के ऊपरी हिस्से में बने विशाल हॉल में सजाया गया था, जो छोटा पड़ गया। इसके बावजूद संगत में कीर्तन दरबार सुनने को लेकर गजब का उत्साह देखने को मिला। गुरूद्वारा के मुख्य द्वार के बाहर खाली जगह पर संगत बैठकर कीर्तन दरबार का आनंद लेती नजर आयी।
वहां पर विशाल स्क्रीन लगाई गई थी, जिस पर सम्पूर्ण कार्यक्रम का लाइव प्रसार हो रहा था। अनेक लोग तो सॉशल मीडिया पर भी लाइव भी हुए। इसके अलावा उधम सिंह चौक से लेकर खालसा नगर तक सड़क के दोनों तरफ वाहनों की कतारें भी लग गई। इस दौरान वाहनों का जाम ना लगे, इसके लिए सेवादारों ने अपनी जिम्मेदारी संभाली। और गुरु साहिब ने रहमत की तीनों दिन के दीवान बड़ी चढ़दी कला व निर्विघ्नता सहित सम्पन्न हुए।
कोरोना योद्धायों को किया सम्मानित
कोरोनकाल में गुरद्वारा बाबा दीप सिंह जी शहीद व सिख स्टूडेंट्स फैडरेशन के सेवादारों के साथ सरकारी हॉस्पिटल के कोरोना वार्डो में जान जोखिम में डाल सेवा निभाने वाले जुझारू वीर योगेश मिड्ढा योगी,वीर मुकेश काला वधवा,दीपक भाटिया,नरेंद्र गोल्डी परुथी, गौरव खुंगर व अवतार सिंह को सिरोपा पहना जैकारों की गूंज में स्वागत किया।