श्रीगंगानगर | न्यूज़ डेस्क | एक तरफ श्रीगुरुतेग बहादुर साहिब जी के 400 साला प्रकाश पर्व को समर्पित चल रहे महान कीर्तन दरबार में मौजूद संगत शबद कीर्तन से निहाल हो रही थी, तो दूसरी तरफ सिक्खों की शौर्यगाथा को दर्शाने वाली प्रदर्शनी की हर झांकी को देखकर संगत भावुक भी हो रही थी।
तीन दिवसीय इस महान कीर्तन दरबार का आज पहला दिन था और पहले ही दिन एक तरह से श्रीगंगानगर ने जैसे इतिहास ही रच डाला। पदमपुर रोड स्थित गुरुद्वारा धन धन बाबा दीपसिंह जी शहीद के विशाल और सभी सुविधाओं से युक्त हॉल में कीर्तन दरबार 7 बजे शुरू होना था, लेकिन संगत इससे पहले ही पहुंचना शुरू हो गई।
हजूरी रागी दलीपसिंह धूरी और भूपेन्द्रसिंह कमल ने शबद गायन से कीर्तन दरबार का आगाज किया। इसके बाद श्रीदरबार साहिब से हजूरी रागी भाई बलविन्द्र सिंह लोपोके ने जैसे ही शबद गायन किया तो संगत निहाल ही हो उठी।
उन्होंने जो नर मैं दुख नहीं मानै, सुख सुबेहु अर भै नहीं जाके कंचन माटी मानै…, धन धन पिता धन धन कुल सु जननी जिनि गुरु जजीआ माऐ…, हरि को नामु सदा सुखदाई, जा कओ सिमरि अजाभलु ऊधोरओ मनका हू गति पाई… जैसे शबदों से संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गुरुद्वारा के प्रमुख सेवादार तेजेन्द्रपाल सिंह टिम्म्मा ने बताया कि तीन दिवसीय इस समागम में सोमवार को श्रीदरबार साहिब से हजूरी रागी भाई सुरिन्द्र सिंह कथा कीर्तन करेंगे और 30 नवंबर को विश्व प्रसिद्ध कथा वाचक भाई पिन्दरपाल सिंह कथा कीर्तन से संगत को निहाल करेंगे।
श्री टिम्म्मा ने बताया कि आज पहले दिन श्रीगंगानगर ही नहीं बल्कि दूर दराज के क्षेत्रों से सभी समाजों के लोग इस आयोजन का हिस्सा बने। देर रात तक चले कीर्तन दरबार में सेवादारों में सेवा के प्रति अविश्वसनीय उत्साह देखने को मिला।
किसी ने जोड़े घर में सेवाएं दीं तो किसी ने लंगर बनाने से लेकर वितरण करने तक योगदान दिया। गुरुद्वारा के प्रधान हरप्रीतसिंह भाटिया बबलू, सतनाम सिंह लाडा, मैनेजर हरनाम सिंह, गुरप्रीतसिंह मठाड़ू, कुलविन्द्र सिंह राजू, जसविन्द्र सहित सभी सेवादारों ने अपनी अपनी जिम्म्म्मेदारी निभाई।
श्रीगंगानगर इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब सिक्खों के शौर्य को दर्शाने वाली अमृतसर से विशेष तौर पर प्रदर्शनी लगाई गई, जिसे देखकर हर कोई भावुक हो उठा, क्योंकि प्रदर्शनी में आठ झांकियों में ही नजर आ गया कि किस तरह से जालिमों में सिक्खों का कत्लेआम किया।
आठ तरह की झांकियां लगाई गई और हर झांकी को देखने वाले ने न केवल अपने मोबाइल में कैद किया बल्कि बहुत से लोग सोशल मीडिया पर लाइव भी हुए। छोटे छोटे बच्चों को उनके परिजन एक एक झांकी के बारे में विस्तार से बताते हुए नजर आए। नई पीढ़ी के लिए यह प्रदर्शनी केवल देखने योग्य नहीं, बल्कि इतिहास से रूबरू होने और उसके बाद गर्व महसूस करने वाली है।
आज पहले दिन के समागम में ऐसे बहुत से लोग थे जो यह कहते नजर आये कि हमने तो सिर्फ सिक्खों के बारे में किताबों में ही पढ़ा था, लेकिन आज हकीकत से रूबरू हुए तो यकीन करना भी मुश्किल हो गया।
अनेक बुजुर्गों ने अपने बच्चों को यह बताया कि किस तरह से जालिमों ने सिक्खों के टुकड़े किए, लेकिन इंसानियत, मानवता और धर्म की रक्षा के लिए कभी भी सिक्ख पीछे नहीं हटे।