मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। नव ग्रहों के गोचर में देव गुरु बृहस्पति का राशि परिवर्तन 20 नवंबर शनिवार को होने जा रहा है। गुरु की स्थिति स्त्री जातकों की जन्म पत्रिका में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। गुरु स्त्री जातकों के लिए पति का नैसर्गिक कारक होता है।
स्त्री को पति सुख प्राप्त होने में भी गुरु की विशेष कृपा रहती है। बालाजी धाम काली माता मंदिर के ज्योतिषाचार्य सतीश सोनी के अनुसार 20 नवंबर, शनिवार रात्रि 11:15 पर गुरु मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे और यह गुरु कुंभ राशि में 13 अप्रैल 2022 तक रहेंगे। उसके बाद अपनी स्वयं की राशि मीन में इनका प्रवेश होगा।
यदि किसी स्त्री की कुंडली में गुरु अस्त, वक्री, निर्बल या अशुभ भाव में स्थित होते हैं तो उसे पति सुख होने में बाधाएं आती हैं। गुरु का गोचर स्त्री जातकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है। स्त्री जातकों के विवाह में त्रिबल शुद्धि हेतु गुरुबल में गुरु का यह राशि परिवर्तन विशेष महत्व रखेगा।
इसके साथ ही गुरु के कुंभ राशि में गोचर करने से शिक्षा, बैंक, वकालत, वाहन, कपड़े, ज्वेलरी, पशुपालन, कृषि, गुप्तचर एजेंसियां, विदेशों से इंपोर्ट एक्सपोर्ट कर्म क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए यह गुरु का गोचर बेहद शुभ तथा लाभप्रद रहेगा। इसके साथ ही बी.पी, शुगर, थायराइड, यूरिन, नेत्र, मोटापे की समस्या से जूझ रहे लोगों को गुरु के इस राशि परिवर्तन से स्वास्थ्य लाभ मिलेगा।
जिन जातकों की राशि से गुरु पूज्य स्थान यानी 4, 8, 12 में गोचर करेंगे। उस स्त्री जातकों का विवाह 1 वर्ष के लिए वर्जित रहेगा। वहीं जिन स्त्रीयों की राशि से गुरु पूज्य स्थान पर रहेंगे। 1, 3, 6, 10 में गोचर करेंगे उनके विवाह गुरु शांति पीली पूजा संपन्न करने के उपरांत हो सकेंगे।
शेष राशि वाले स्त्री जातकों के लिए गुरु शुभ रहेंगे। विवाह के लिए वर्जित राशि वृश्चिक राशि, कर्क राशि, मीन राशि। वहीं पूज्य गुरु राशि वृषभ, कन्या, धनु, कुंभ, गुरु शांति के उपरांत विवाह हो सकेंगे।