मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | पुरुषोत्तम मास के बाद कार्तिक महीने शुरू हो गया है | इस पावन महीने में त्योहारों की शुरुआत हो जाती है | इसी माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है | पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु चार माह के लिए सो जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जगते हैं | चार माह की इस अवधि को चतुर्मास कहते हैं | देवउठनी एकादशी के दिन चतुर्मास का अंत हो जाता है और शादी-विवाह के काज शुरू हो जाते हैं |
अगले दिन शालिग्राम-तुसली विवाह
स्कंदपुराण के कार्तिक माहात्मय में भगवान शालिग्राम की स्तुति की गई है और कहा गया है कि इसके दर्शन से समस्त तीर्थों का फल प्राप्त होता है. प्रति वर्ष कार्तिक मास की द्वादशी को महिलाएं प्रतीक स्वरूप तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह करवाती हैं. इस वर्ष गुरुवार, 26 नवंबर को शालिग्राम और तुलसी का विवाह होगा. उसके बाद ही हिंदू धर्म के अनुयायी विवाह आदि शुभ कार्य प्रारंभ करते हैं |
तुलसी से क्यों किया था भगवान विष्णु ने विवाह
शंखचूड़ नामक दैत्य की पत्नी वृंदा अत्यंत सती थी. बिना उसके सतीत्व को भंग किए शंखचूड़ को परास्त कर पाना असंभव था. श्री हरि ने छल से रूप बदलकर वृंदा का सतीत्व भंग कर दिया और तब जाकर शिव ने शंखचूड़ का वध किया. वृंदा ने इस छल के लिए श्री हरि को शिला रूप में परिवर्तित हो जाने का शाप दिया. श्री हरि तबसे शिला रूप में भी रहते हैं और उन्हें शालिग्राम कहा जाता है.
इन्ही वृंदा ने अगले जन्म में तुलसी के रूप में पुनः जन्म लिया था. श्री हरि ने वृंदा को आशीर्वाद दिया था कि बिना तुलसी दल के कभी उनकी पूजा सम्पूर्ण ही नहीं होगी. जिस प्रकार भगवान शिव के विग्रह के रूप में शिवलिंग की पूजा की जाती है. उसी प्रकार भगवान विष्णु के विग्रह के रूप में शालिग्राम की पूजा की जाती है. शालिग्राम एक गोल काले रंग का पत्थर है जो नेपाल के गण्डकी नदी के तल में पाया जाता है. इसमें एक छिद्र होता है और पत्थर के अंदर शंख, चक्र, गदा या पद्म खुदे होते हैं |
क्या है शालिग्राम का महत्व
श्रीमद देवी भागवत के अनुसार जो व्यक्ति कार्तिक महीने में भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पण करता है. 10,000 गायों के दान का फल निश्चित रूप से प्राप्त करता है. वैसे भी नित्य शालिग्राम का पूजन भाग्य और जीवन बदल देता है. शालिग्राम का विधि पूर्वक पूजन करने से किसी भी प्रकार की व्याधि और ग्रह बाधा परेशान नहीं करती हैं. शालिग्राम जिस भी घर में तुलसीदल ,शंख और शिवलिंग के साथ रहता रहता है, वहां पर सम्पन्नता रहती ही है |