मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | दिवाली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्यौहार है. देशभर में इस त्यौहार को धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता है| पांच दिन चलने वाले दीपोत्सव महापर्व की शुरुआत धनतेरस के दिन से होती है| इसके बाद अगला दिन रुप चौदस का होता है| रुप चौदस के अगले दिन दिवाली मनाई जाती है|
इस दिन भगवान गणेश और मां लक्ष्मी का पूजन कर सुख शांति एवं समृद्धि की कामना की जाती है| दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है| इस दिन पशुपालक अपने जानवरों को सजाते हैं, वहीं दीपोत्सव पर्व का समापन भाईदूज के साथ होता है| इस साल धनतेरस 02 नवंबर को मनायी जाएगी. इसी के साथ दीपोत्सव की शुरुआत हो जाएगी|
5 दिनों तक होता है दिवाली सेलिब्रेशन
- धनतेरस – दिवाली की तैयारियां वैसे तो कई दिनों पहले से ही होने लगती हैं, लेकिन दिवाली की शुरुआत धनतेरस के दिन से मानी जाती है| इस दिन सोना,चांदी, घर के बर्तन या अन्य कोई सामान खरीदने की परंपरा है| इस साल 02 नवंबर (मंगलवार) को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा| इस दिन भगवान धन्वंतरि, कुबेर देवता, माता महालक्ष्मी और यमराज का पूजन किया जाता है| ज्योतिषाचार्य पंडित चंद्रभूषण व्यास के अनुसार यह दिन मकान, दुकान आभूषण या वाहन की खरीदी के लिए भी काफी शुभ माना जाता है|
शुभ मुहूर्त
धनतेरस – 02 नवंबर, मंगलवार
धन त्रयोदशी पूजन मुहूर्त
लाभ – प्रात: 11.31 से 12.10 तक
अभिजित – प्रात: 11.48 से 12.33 तक
अमृत – दोपहर 12.10 से 01.34 तक
लाभ – शाम 07.23 से 08.59 तक
शुभ – रात्रि 10.35 से 12.35 तक
- नरक चतुर्दशी – धनतेरस के अगले दिन नरक चतुर्दशी मनाई जाती है| इसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है| धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर विधि-विधान से पूजा अर्चना करने पर
व्यक्ति को नरक से मुक्ति मिलती है और स्वर्ग की प्राप्ति होती है| नरक चतुर्दशी की रात में दिवाली की रात की तरह ही घर को दीपों से रोशन किया जाता है| इसी वजह से यह छोटी दिवाली कहलाती है. इस साल 03 नवंबर (बुधवार) को यह पर्व मनाया जाएगा| - दिवाली – नरक चतुर्दशी के अगले दिन दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है| यह त्यौहार हिंदुओं का मुख्य त्यौहार है| इस दिन शुभ मुहूर्त में धन की देवी मां लक्ष्मी और गणेश जी का पूजन किया जाता है| दिवाली इस बार 04 नवंबर (गुरुवार) को सेलिब्रेट की जाएगी| इस दिन विधि-विधान से पूजन अर्चन करने से जीवन में सुख-शांति एवं समृद्धि प्राप्त होती है| आचार्य पं. नवीन उपाध्याय के अनुसार इस दिन गोधुली बेला में घरो में मां लक्ष्मी का पूजन किया जाना चाहिए|
शुभ मुहूर्त
दीपोत्सव विधि मूहूर्त
कार्तिक कृष्ण अमावस्या दिनांक 4:11: 2021 गुरुवार
प्रातः 06.16 – 08.54 शुभ वेला
दिवा 11.00 – 12.42 चंचल वेला
दिवा 11.58 – 12.42 अभिजीत वेला
दिवा 12.21 – 01.30 लाभ वेला
दिवा 04.28 – 05.50 शुभ वेला
गोधूलि वेला 05.50 – 08.26
वृश्चिक लग्न प्रातः 07.50 – 10.06
कुंभ लग्न दिवा 01.54 – 03.24
वृषभ लग्न सायं 06.30 – 08.25
सिंह लग्न रात्रि 12.57 – 03.13
गोवर्धन पूजा – दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है| इस दिन पशुपालक अपने जानवरों को सजाते हैं| इस दिन गायों की सेवा करने का विशेष महत्व माना जाता है| मान्यता है कि इसी दिन भगवान
श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्रदेव के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया था| इस बार 05 नवंबर (शुक्रवार) को यह त्यौहार मनाया जाएगा|
शुभ मुहूर्त
प्रात: 06:35 से 10:46 बजे तक
दोपहर 12:10 से 1:34 बजे तक
भाई दूज – गोवर्धन पूजा के अगले दिन भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है| यह दिवाली के पांच दिनी महापर्व का आखिरी दिन है| इस दिन बहनें अपने भाईयों को रक्षासूत्र बांधती है| भाई की लंबी उम्र के लिए यम के नाम का दीपक घर के बाहर जलाया जाता है| इससे अकाल मृत्यू का भय दूर होता है| इस बार भाई दूज 06 नवंबर (शनिवार) को मनाई जाएगी|
शुभ मुहूर्त
प्रात: 07:59 से 09:23 बजे तक
दोपहर 12:10 से 4:23 बजे तक