मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | करवा चौथ व्रत का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व होता है| इस साल करवा चौथ 24 अक्टूबर (रविवार ) को मनाया जाएगा| इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए व्रत रखती हैं| यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे अहम व्रत माना जाता है| करवा चौथ के दिन महिलाएं बड़े ही श्रद्धा भाव से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं|
इस दिन व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश के साथ चंद्रमा की भी पूजा की जाती है. करवा चौथ का त्योहार पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक है| यही नहीं कुंवारी लड़कियां भी मनवांछित वर के लिए इस दिन व्रत रखती हैं| करवा चौथ का पावन व्रत हर साल कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन रखा जाता है|
करवा चौथ दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, जम्मू और कश्मीर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश सहित देश के उत्तरी भाग में अधिक लोकप्रिय है| करवा चौथ व्रत इस बार रोहिणी नक्षत्र में होगा|
इस बार करवा चौथ रोहिणी नक्षत्र में होने की वजह से व्रती महिलाओं को सूर्यदेव का असीम आशीर्वाद प्राप्त होगा| ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस व्रत में खास संयोग बन रहा है. रविवार को सूर्य का प्रभाव ज्यादा होता है|
सूर्य देव आरोग्य और दीर्घायु के प्रतीक हैं. करवा चौथ 24 अक्टूबर को सुबह 3 बजकर 1 मिनट से शुरू हो रहा है| यह 25 अक्टूबर सुबह 5 बजकर 43 मिनट तक चलेगा| व्रत का शुभ मुहूर्त 24 अक्टूबर की शाम 6.55 मिनट से रात 8 बजकर 51 मिनट के बीच बन रहा है|
करवा चौथ व्रत के नियम और रीति-रिवाज
करवा चौथ के दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले खाने-पीने के लिए उठती हैं और फिर सूर्यास्त तक निर्जला उपवास रखती हैं| करवा चौथ व्रत के दौरान महिलाएं सूर्योदय से सूर्यास्त तक कुछ भी खाती-पीती नहीं हैं| इस मौके पर व्रत करने वाली महिलाएं श्रेष्ठ दिखने के लिए पारंपरिक पोशाक जैसे साड़ी या लहंगा पहनती हैं| व्रत रखने वाली महिलाएं हाथों में मेहंदी भी लगाती हैं और दुल्हन की तरह श्रृंगार रती हैं और आभूषण पहनती हैं|
करवा चौथ की पूर्व संध्या पर केवल महिलाओं का समारोह आयोजित किया जाता है, जहां वे अपनी पूजा थालियों के साथ एक मंडली में बैठती हैं| स्थानीय परम्पराओं के आधार पर पूजा गीतों के साथ करवा चौथ की कहानी सुनाई जाती है और पूजा के बाद महिलाएं आसमान में चंद्रमा के दिखने का इंतजार करती हैं|
एक बार जब चंद्रमा दिखाई देता है, तब व्रत करने वाली महिला एक छलनी के माध्यम से पानी से भरे बर्तन में चांद या उसके प्रतिबिंब को देखती हैं और फिर छलनी से अपने पति को देखती हैं|
व्रत करने वाली महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं. फल और मिठाई चढ़ाती हैं और अपने पति की लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं| उसके बाद पति थाली से पानी और फल लेता है और अपनी पत्नी को व्रत तोड़ने के लिए खिलाता है| पति के हाथों से पानी पीने के बाद पत्नी अपना व्रत तोड़ती है| महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत काफी अहम माना जाता है|