नई दिल्ली | न्यूज़ डेस्क | ईद-ए-मिलाद-उन-नबी या ईद-ए-मिलाद 19 अक्टूबर को है | मान्यता है कि इस दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद का जन्म हुआ था | उन्हें इस्लाम धर्म का संस्थापक माना जाता है | इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार इस्लाम के तीसरे महीने रबी-अल-अव्वल की 12वीं तारीख, 571 ईं के दिन ही मोहम्मद साहेब जन्मे थे |
इस दिन मजलिसें लगाई जाती हैं | पैगंबर मोहम्मद द्वारा दिए गए पवित्र संदेशों को पढ़ा जाता है | उन्हें याद कर शायरी और कविताएं पढ़ी जाती हैं | मस्जिदों में नमाज़ें अदा की जाती हैं | यहां जानिए ईद-ए-मिलाद-उन-नबी और पैगंबर हजरत मोहम्मद के बारे में और खास बातें |
पैगंबर मोहम्मद का पूरा नाम पैगंबर हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम था | वह इस्लाम के सबसे महान नबी और आखिरी पैगंबर थे | उनका जन्म मक्का शहर में हुआ | इनके पिता का नाम मोहम्मद इब्न अब्दुल्लाह इब्न अब्दुल मुत्तलिब और माता का नाम बीबी अमिना था |
कहा जाता है कि 610 ईं | में मक्का के पास हीरा नाम की गुफा में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई | बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म की पवित्र किताब कुरान की शिक्षाओं का उपदेश दिया | हजरत मोहम्मद ने 25 साल की उम्र में खदीजा नाम की विधवा से शादी की |
उनके बच्चे हुए, लेकिन लड़कों की मृत्यु हो गई | उनकी एक बेटी का अली हुसैन से निकाह हुआ | उनकी मृत्यु 632 ई. में हुई | उन्हें मदीना में ही दफनाया गया |
मुसलमान पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्म की खुशी में ईद-ए-मिलाद-उन-नबी मनाते हैं | इस दिन रात भर प्रार्थनाएं चलती हैं | जुलूस निकाले जाते हैं | सुन्नी मुसलमान इस दिन हजरत मोहम्मद के पवित्र वचनों को पढ़ते हैं
और याद करते हैं | वहीं, शिया मुसलमान मोहम्मद को अपना उत्तराधिकारी मानते हैं | हजरत मुहम्मद के जन्मदिन को ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के नाम से मनाया जाता है |
पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्मदिवस के अवसर पर घरों और मस्ज़िदों को सजाया जाता है | नमाज़ों और संदेशों को पढ़ने के साथ-साथ गरीबों को दान दिया जाता है | उन्हें खाना खिलाया जाता है | जो लोग मस्जिद नहीं जा पाते वो घर में कुरान पढ़ते हैं | मान्यता है कि ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के दिन कुरान का पाठ करने से अल्लाह का रहम बरसता है |