गुजरात | नेहा शाह |नवरात्रि के बाद, दसवें दिन विजयदशमी मनाई जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों को तीन मौलिक गुणों- तमस, रजस और सत्त्व केअनुसार बांटा गया है। किसी व्यक्ति में इन तीनों गुणों की प्रधानता उसे अलग-अलग तरीके से शक्तिशाली बनाती है। लेकिन विजयदशमी का दिन इस बात का प्रतीक है कि आप इन तीनों पर विजय प्राप्त कर आगे बढ़ गए हैं।
त्रि-गुण पर विजय का अवसर
नवरात्रि को तमस, रजस और सत्त्व के तीन मौलिक गुणों के अनुसार बांटा गया है। पहले तीन दिन तमस हैं, जहां देवी दुर्गा या काली की तरह प्रचंड हैं। अगले तीन दिन लक्ष्मी से सम्बंधित हैं, जो सौम्य हैं, पर वे सांसारिकता की देवी हैं। अंतिम तीन दिन सरस्वती को समर्पित हैं, जो सत्त्व को इंगित करती हैं। इन तीन में निवेश करना आपके जीवन को एक खास तरह से बनाएगा।
वरात्रि दशहरे पर समाप्त होती है। यह सांस्कृतिक उत्सव सबके लिए बहुत महत्त्व का है। यह पूरा उत्सव देवी के बारे में है। कर्नाटक में दशहरा चामुंडी के लिए, बंगाल में दुर्गा के लिए होता है। इस तरह, अलग-अलग जगहों पर यह विभिन्न देवियों के बारे में है, लेकिन मुख्य रूप से यह देवी या स्त्रैण दिव्यता के बारे में है।
उत्सव का दसवां दिन
नवरात्रि, दुष्ट प्रकृति के संहार के प्रतीकों से और जीवन के सभी पहलुओं के प्रति तथा उन चीजों के प्रति आदर रखने से भरा हुआ है, जो हमारी खुशहाली में योगदान करते हैं। नवरात्रि को तमस, रजस और सत्त्व के तीन मौलिक गुणों के अनुसार बांटा गया है। पहले तीन दिन तमस हैं, जहां देवी दुर्गा या काली की तरह प्रचंड हैं। अगले तीन दिन लक्ष्मी से सम्बंधित हैं, जो सौम्य हैं, पर वे सांसारिकता की देवी हैं। अंतिम तीन दिन सरस्वती को समर्पित हैं, जो सत्त्व को इंगित करती हैं। यह ज्ञान और आत्मबोध से जुड़े हैं।
विजय का दिन
इन तीन में निवेश करना आपके जीवन को एक खास तरह से बनाएगा। अगर आप तमस से जुड़ते हैं, तो आप एक तरह से शक्तिशाली होंगे। अगर आप रजस से संचालित हैं, तो आप एक अलग तरह से शक्तिशाली होंगे। अगर आपमें सत्त्व प्रधान है, तो आप एक बिलकुल ही अलग तरह से शक्तिशाली होंगे। लेकिन अगर आप इन सबसे परे चले जाते हैं, तो फिर यह शक्ति के बारे में नहीं रहता, यह मुक्ति के बारे में हो जाता है। नवरात्रि के बाद, दसवां और अंतिम दिन विजयदशमी है, जिसका अर्थ है कि आपने इन तीनों गुणों पर विजय पा ली है। आपने इनमें से किसी से हार नहीं मानी है, आप उन सभी को देख कर आगे बढ़ गए हैं। आपने प्रत्येक में भागीदारी की, लेकिन आपने किसी में निवेश नहीं किया। आपने उन सब पर जीत हासिल की है। यही विजयदशमी है, विजय का दिन। इससे हमें यह संदेश मिलता है कि हम कैसे उन सब चीजों के प्रति आदर और आभार की भावना लाएं, जिनका हमारे जीवन में महत्त्व है, ताकि यह सफलता और विजय लाए।
भक्ति और आदर
जिन चीजों के साथ हम संपर्क में हैं, जो चीजें हमारे जीवन का सृजन और निर्माण करती हैं, उन तमामों चीजों में से सबसे महत्त्वपूर्ण उपकरण हमारा शरीर और मन है, जिनका हम अपने जीवन में सफलता लाने के लिए उपयोग करते हैं। आप जिस धरती पर चलते हैं, जो हवा आप सांस में लेते हैं, जो पानी आप पीते हैं, जो भोजन आप खाते हैं, जिन लोगों के साथ आप संपर्क में आते हैं, और हर चीज, जो आप इस्तेमाल करते हैं, जिसमें आपका शरीर और मन भी शामिल है, इन चीजों के प्रति आदरभाव रखना हमें अपना जीवन जीने की एक अलग संभावना की ओर ले जाएगा। इन सारे पहलुओं के प्रति आदर और भक्ति की अवस्था में होना यह सुनिश्चित करने का एक तरीका है कि हम अपने हर प्रयास में सफल हों।
आनंद और प्रेम के साथ मनाइए
पारम्परिक रूप से, भारतीय संस्कृति में, दशहरे के उत्सव में हमेशा भरपूर नृत्य होते हैं, जहां सारे समुदाय एक दूसरे में घुल-मिल जाते हैं। लेकिन पिछले दो सौ सालों में बाहरी प्रभावों और हमलों के कारण, हमने आज वह खो दिया है। वरना, दशहरा हमेशा बहुत जीवंत होता है। कई जगहों पर यह अब भी है, लेकिन बाकी के देश में यह घटता जा रहा है। हमें इसे वापस लाना है। विजयदशमी या दशहरे का उत्सव इस भूमि पर रहने वाले सभी लोगों के लिए जबरदस्त सांस्कृतिक महत्त्व का है- उनकी जाति, संप्रदाय या धर्म चाहे जो भी हो - और इसे प्रेम और उल्लास के साथ मनाना चाहिए। मेरी यह कामना और मेरा आशीर्वाद है कि आप सबको दशहरा पूरी भागीदारी, आनंद और प्रेम से मनाना चाहिए।