April 02, 2022

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आज से चैत्र नवरात्रि शुरू : जानिए घटस्थापना शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नियम




मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | चैत्र नवरात्रि 02 अप्रैल,शनिवार यानी आज से शुरू होकर 10 अप्रैल,रविवार तक चलेगी। इस दौरान देशभर में नवरात्रि के 9 दिनों में देवी मां के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा करने से खास कृपा बरसती है। इस दौरान लगभग हर नवरात्रि करने वालों के घर में घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है। इस बार नवरात्रि घटस्थापना का मुहूर्त 2 अप्रैल 2022,शनिवार को सुबह 06 बजकर 03 मिनट से 08 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। यदि इस मुहुर्त में कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं तो अभिजित काल में 11:48 से 12:37 तक कलश स्थापना कर सकते हैं।

इस नवरात्रि में माता का आगमन घरों में घोड़े पर हो रहा है। जब भी नवरात्रि में माता का आगमन घोड़े पर होता है तो समाज में अस्थिरता, तनाव, अचानक बड़ी दुर्घटना, भूकंप चक्रवात आदि से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। आम जनमानस के सुखों में कमी की अनुभूति होती है। इसलिए इस नवरात्रि में माता का पूजन अर्चन क्षमा प्रार्थना के साथ किया जाना नितांत आवश्यक है प्रत्येक दिन विधिवत पूजा के उपरांत क्षमा प्रार्थना किया जाना भी अति आवश्यक होगा लाभदायक होगा।
नवरात्रि के पहले दिन घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक बनाएं और दरवाजे पर आम के पत्ते का तोरण लगाएं। क्योंकि माता इस दिन भक्तों के घर में आती हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं और आपके घर में निवास करती हैं। नवरात्रि में माता की मूर्ति को लकड़ी की चौकी या आसन पर स्थापित करना चाहिए। जहां मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें वहां पहले स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। उसके बाद रोली और अक्षत से टीकें और फिर वहां माता की मूर्ति को स्थापित करें। उसके बाद विधि विधान से माता की पूजा करें।

Happy Navratri 2022

उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को पूजा के लिए सर्वोत्तम स्थान माना गया है। आप भी अगर हर साल कलश स्थापना करते हैं तो आपकी इसी दिशा में कलश रखना चाहिए और माता की चौकी सजानी चाहिए। शास्त्रों में कलश पर नारियल रखने के विषय में बताया गया है कि “अधोमुखं शत्रु विवर्धनाय, ऊर्धवस्य वस्त्रं बहुरोग वृध्यै। प्राचीमुखं वित विनाशनाय,तस्तमात् शुभं संमुख्यं नारीलेलंष्।” यानी कलश पर नारियल रखते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि नारियल का मुख नीचे की तरफ नहीं हो। नारियल का मुख नीचे होने से शत्रुओं की वृद्धि होती है। नारियल खड़ा करके रखते हैं और उसका मुंह ऊपर की ओर होता है तब रोग बढ़ता है,यानी घर में रहने वाले लोग अधिक बीमार होते हैं। कलश पर नारियल रखते समय अगर नारियल का मुख पूर्व दिशा की ओर होता है तो आर्थिक हानि होती है यानी धन की हानि के योग बनते रहते,लेकिन कलश स्थापना का यह उद्देश्य तभी सफल होता है जब कलश पर रखा हुआ नारियल का मुख पूजन करने वाले व्यक्ति की ओर हो। विज्ञापन

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9 दिन में करें मां के नौ रूपों की पूजा
अपने कुल देवी देवता की पूजा के साथ-साथ नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना अर्थात घटस्थापना के साथ ही नवरात्रि की शुरुआत होती है। पहले दिन मां शैलपुत्री तो दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा,चौथे दिन मां कुष्मांडा,तो पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा होती है। छठे दिन मां कात्यायनी एवं सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। आठवें दिन महागौरी तो नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

शुद्ध पवित्र आसन ग्रहण कर ऊं दुं दुर्गाये नमः मंत्र का रुद्राक्ष या चंदन की माला से पांच या कम से कम एक माला जप कर अपना मनोरथ निवेदित करें। पूरी नवरात्रि प्रतिदिन जप करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और मनोकामना पूरी होती है। कई बार ऐसा होता है कि विधानपूर्वक पूजा करने पर भी वांछित फल की प्राप्ति नहीं हो पाती। भक्तों को यह ध्यान रखना चाहिए कि दुर्गा जी की पूजा में दूर्वा,तुलसी,आंवला आक और मदार के फूल अर्पित नहीं करें। लाल रंग के फूलों व रंग का अत्यधिक प्रयोग करें।

मां दुर्गा की पूजा सूखे वस्त्र पहनकर ही करनी चाहिए ,गीले कपड़े पहनकर नहीं। अक्सर देखने में आता है कि महिलाएं बाल खुले रखकर पूजन करती हैं,जो निषिद्ध है। विशेष कर दुर्गा पूजा या नवरात्रि में हवनपूजन और जप आदि के समय उन्हें बाल खुले नहीं रखने चाहिए।

दुर्गा सप्तशती की महिमा
सप्तशती में कुछ ऐसे भी स्तोत्र और मंत्र हैं जिनके विधिवत पाठ से वांछित फल की प्राप्ति होती है।

सर्वकल्याण के लिए
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। 
शरण्येत्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते।।

बाधा मुक्ति और धन-पुत्रादि प्राप्ति के लिए

सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः। 
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय।।

आरोग्य एवं सौभाग्य प्राप्ति के लिए
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्। 
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजही।।




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सोनम कौर भाटिया

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