March 14, 2022

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आखिर क्यों महादेव ने कामदेव को किया था भस्म : जानिए होली से जुड़ी यह कथा




मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | हिंदू धर्म में होली एक प्रमुख त्योहार है, जिसका विशेष महत्व है और होली पर्व हर साल फाल्गुन मास में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। रंगों के इस त्योहार की शुरुआत होलिका दहन से होती है। होलिका दहन के बाद अगले दिन रंगों और गुलाल से होली खेली जाती है। होलिका दहन इस साल 17 मार्च 2022 को और होली पूरे देश में 18 मार्च को मनाई जाएगी।

होलिका दहन को लेकर आपने अभी तक हिरण्यकश्यप, भक्त प्रहलाद व होलिका को लेकर पौराणिक कथा जरूर सुनी होगी, लेकिन आज हम आपको भगवान शिव और कामदेव से जुड़ी होली की इस पवित्र कथा के बारे में बताने जा रहे हैं। पौराणिक मान्यता है कि माता पार्वती भगवान शिव शंकर से विवाह करना चाहती थीं, लेकिन जब भगवान शिव तपस्या में लीन थे तो उन्होंने माता पार्वती की ओर ध्यान नहीं दिया।

ऐसे में माता पार्वती ने भगवान शिव की तपस्या भंग करने के लिए भगवान कामदेव की सहायता मांगी थी। जब भगवान कामदेव ने भगवान शिव पर फूल बाण चलाया तो भगवान महादेव की तपस्या भंग हो गई, जिससे क्रोधित होकर महादेव का तीसरा नेत्र खुल गया और इस क्रोध की आग में कामदेव भस्म हो गए।

माता पार्वती की पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। माता पार्वती की इच्छा सिद्ध करते हुए कामदेव भस्म हो गए इसलिए कामदेव की पत्नी रति ने भगवान भोलेनाथ की पूजा की और भगवान शिव को प्रसन्न किया। जब भगवान शिव को देवी रति ने बताया कि कामदेव निर्दोष थे बल्कि वे केवल माता पार्वती की मदद कर रहे थे। तब भगवान शिव ने कामदेव को फिर जीवित कर दिया।

ऐसी मान्यता है कि तब भगवान शिव ने कामदेव को एक नए देवता के रूप में जन्म दिया और पौराणिक मान्यता के अनुसार उस दिन फाल्गुन की पूर्णिमा थी। इस दिन लोगों ने आधी रात को होली जलाई। भोर होते-होते उसकी आग में वासना का मैल जल गया और प्रेम के रूप में प्रकट हो गया। ऐसा माना जाता है कि तभी से कामदेव ने नई सृष्टि की प्रेरणा जगाते हुए शारीरिक भावना से जीत का जश्न मनाना शुरू किया।




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सोनम कौर भाटिया

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