मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोद जी | देव गुरु ब्रहस्पति आज कुंभ राशि में अस्त हो रहे हैं। इसी के साथ ही शादियों पर विराम लग जाएगा। 22 फरवरी गुरु बृहस्पति के अस्त होने के बाद से न मांगलिक कार्यक्रम होगें न शहनाई बजेगी। वहीं सूर्य देव मकर राशि को छोड़कर कुंभ राशि में प्रवेश करेगें। कुंभ राशि में सूर्य व गुरु की युति 12 साल बाद बन रही है। इससे पहले कुंभ राशि में गुरु और शनि की युति बनी थी। बृहस्पति ग्रह को गुरु कहा जाता है। ये ग्रह धनु और मीन राशि का स्वामी ग्रह हैं। गुरु ज्ञान, शिक्षा, दान, पुण्य व धार्मिक कार्य के कारक माने जाते हैं।
जिस व्यक्ति पर इस ग्रह की कृपा बरसती है उसका जीवन खुशहाल रहता है। गुरु ग्रह कुंभ राशि में गोचर कर रहा है। इस ग्रह के अस्त होने की अवधि 22 फरवरी से 22 मार्च तक रहेगी। कुंभ राशि में गुरु व सूर्य की युति का संयोग 12 साल बाद बन रहा है। गुरु बृहस्पति के अस्त होने के बाद मांगलिक कार्यक्रम में विराम लग जाएगा। वहीं एक महीने तक शहनाई की गूंज भी नहीं सुनाई देगी। कुंभ राशि में गुरु बृहस्पति के अस्त होने का लाभ दो राशियों को अधिक मिलेगा। मेष और सिंह राशि के लिए गुरु का गोचर होना किस्मत बदलेगा। ऐसा संयोग कई साल बाद बन रहा है।
6 राशियों के लिए शुभ रहेगा गुरु का अस्त
गुरु बृहस्पति का अस्त होना वृषभ, मिथुन, तुला, धनु, मकर और कुंभ राशि के लिए बहुत ही फलदायी होगा। इन राशि के जातकों के लिए मां लक्ष्मी की कृपा बरसेगी। घर में सुख-समृद्धि आएगी।
4 राशियों के जातक रहें सर्तक
गुरु के अस्त होने पर कर्क, कन्या, वृश्चिक और मीन राशि वालों को सावधान रहना होगा। ऐसे लोगों को बेवजह विवाद से बचना होगा। धन हानि होने की भी संभावनाएं प्रबल हैं।
तीन दिन बुढापा, तीन दिन बालपन
गुरु ग्रह अस्त 19 फरवरी से शुरू हुआ था। तीन दिन तक गुरु ग्रह बाध्र्यक (बुढ़ापा) काल में थे। इसी तरह उदयातिथि से तीन दिन पहले तक यानि 19 मार्च से 22 मार्च तक बालपन में रहेगें।