नागपुर । प्रा. विवेक बांबल । भारतीय राजनीति इस समय लाभार्थी योजनाओं और गारंटी आधारित राजनीति के दौर से गुजर रही है। चुनावी विमर्श अब केवल न विचारधारा, संगठन या भाषणो तक सीमित नहीं रहा बल्कि सीधे-सीधे इस सवाल पर टिक गया है कि आम नागरिक के जीवन - मै कौन-सी योजना कितना ठोस निरंतर भरोसेमंद लाभ पहुंचा रही है। मध्य प्रदेश - इसका सबसे जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है।
2023 के विधानसभा चुनाव मे शिवराज सिंह चौहान सरकार की लाडली बहन योजना और किसानों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं ने राजनीति की दिशा ही बदल दी। अब जब 2029 में विधानसभा चुनाव आएंगे तो यह सवाल और ज्यादा प्रासंगिक होजाएगा कि क्या यही योजनाएं दोबारा निर्णायक साबित होगी या किसानों की गारंटी पर आधारित राजनीति में कोई नया करिश्मा करने में सफल हो पाएगी। मध्य प्रदेश की राजनीति के मुकाबले महाराष्ट्र में चुनावी लुभावने वादों का कोई इतिहास नहीं है लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने इसे एक नए स्तर पर पहुँचाने का कार्य किया था। लाडली बहना योजना ने महिलाओ को केवल आर्थिक सहायता नहीं दी बल्कि आत्मसम्मान सुरक्षा और राजनीतिक चेतना भी प्रदान कर हर महीने सीधे खाते में आने वाली राशि ने लाखो महिलाओ के जीवन मेंवास्तविक बदलाव किया है। यह योजना घर-परिवार के फैसलो से लेकर चुनावी व्यवहार तक मे महिलाओ की भूमिका को मजबूत कर रही है। यही कारण है कि महाराष्ट्र विधानसभा 2024 के चूनावों में महिला मतदाताओं का बड़ा वर्ग भाजपा के साथ मजबूती से खड़ा नजर आया। वहीं दूसरी ओर काग्रेस की गारंटी राजनीति है जो देश की राजनीति मे तेजी से फैली है।
राहुल गांधी की न्याय गारंटी जिसके अंतर्गत महिलाओं को सालाना एक लाख रुपये पाओ के लिए नौकरी गारंटी, किसानों के लिए कर्ज माफी जैसे वादे न केवल सुनने में आकर्षक लगते, बल्कि मोह लेने वाले भी हैं किंतु चुनाव रणनीति की व्युह रचना प्रभावी न बनने के कारण वह विजयी नहीं हो पा रही है। और उसका घोषणापत्र धरा का धरा रह गया है।