July 03, 2024

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वास्तु शास्त्र हम सभी के लिए महत्वपूर्ण : समृद्धि और समन्वय बनने में विशेष महत्व

भारतीय संस्कृति में वास्तु शास्त्र का महत्व आज भी बरकरार


वस्तु गुरु । राणा सिकंदर । वास्तु शास्त्र हम सभी के लिए महत्वपूर्ण है। वास्तु शास्त्र भारतीय संस्कृति में गृहनिर्माण, स्थापत्यकला और नगरनिर्माण के लिए मानक निर्देश प्रदान करता है। इसका उद्देश्य स्थान, भवन और नगर के निर्माण में समर्थता, सौंदर्य और अनुकूलता सुनिश्चित करना है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, एक भवन की निर्माण की स्थान, भूमि, दिशा, रख-रखाव, और वास्तुशिल्प के माध्यम से होनी चाहिए। इसमें संतुलन और समर्थता को ध्यान में रखकर भवन का निर्माण किया जाता है। राम राज्य में वास्तु शास्त्र का पालन करते हुए भवनों का निर्माण किया जाता था ताकि समर्थता, सुन्दरता और सभी भवनों के बीच संतुलन का ध्यान रखा जा सके। पवित्र ग्रंथ रामायण में भी राम और सीता के आलय का वर्णन आपको वास्तु शास्त्र के प्रमाण मिलता है।

वास्तु शास्त्र की जानकारी को ध्यान में रखते हुए, हम समय के साथ बदले और विकासित हो गए हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति में वास्तु शास्त्र का महत्व आज भी बरकरार है।

एस्ट्रो वास्तु वास्तु शास्त्र का एक विशेष शाखा है जो उपग्रहों और ग्रहों के प्रभाव पर आधारित होती है। इसका मुख्य उद्देश्य घर या बिजनेस स्थान की वास्तुशास्त्रीय सुधार के माध्यम से खुशहाली, समृद्धि और सामर्थ्य को बढ़ाना होता है।

एस्ट्रो वास्तु के अनुसार, ग्रहों और उपग्रहों के स्थान और प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इसमें भवन या स्थान के बंदरगाह और इंटीरियर की योजना बनाई जाती है। इसमें नक्षत्र, राशि, ग्रह, नक्षत्रों की दिशाएँ और उनका प्रभाव का विशेष महत्व होता है।

उदाहरण के लिए, वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर दिशा सूर्य की दिशा मानी जाती है और यह उपयुक्त स्थान होता है व्यवसायिक क्षेत्र के लिए। तो एस्ट्रो वास्तु में, इस दिशा को ध्यान में रखते हुए व्यवसाय के बंदरगाह या कार्यालय की योजना बनाई जाती है ताकि सफलता और समृद्धि को बढ़ाने का प्रयास किया जा सके।

एस्ट्रो वास्तु मे प्राणी शक्ति, पाँच तत्व, नक्षत्रों, ग्रहों और उनके प्रभावों के साथ-साथ हमारे आसपास की ऊर्जा का समझना और उसे वास्तुशास्त्रीय सुधारों में शामिल करना होता है। ये सुधार व्यक्ति के जीवन और परिवेश में सुख, समृद्धि और समन्वय लाने का प्रयास करते हैं।

हमारे आसपास के वातावरण और स्थान का वास्तुशास्त्रीय ढंग से निर्माण हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। लेकिन ठीक ढंग से वास्तुशास्त्र का पालन करने से सुख, समृद्धि और शांति की भावना महसूस होती है।

वास्तु शास्त्र के पालन से अच्छे विचार, प्रकार, आरामदायक और सकारात्मक एनर्जी का संचार होता है। सही दिशा में खड़ा होने से सूर्य की किरणें सीधे बॉडी के साथ मिलती हैं, जो आपके स्‍वास्‍थ्य, मानसिक स्थिति और कामयाबी को प्रभावित करती हैं।


वास्तुशास्त्रीय सुधार से अपने आसपास के वातावरण को स्वास्थ्यपूरक बना सकते हैं, जिससे आपका उत्साह और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। पारिवारिक संबंधों, पेशेवर सफलता, धन की वृद्धि, व्यक्तिगत विकास और मानसिक शांति में भी वास्तुशास्त्र का प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है।

लोग वास्तु शास्त्र को मानते हैं और अपने घर और ऑफिस की योजना में वास्तुशास्त्रीय सिद्धांतों को ध्यान में रखते हैं ताकि वे अधिक सकारात्मक, स्वस्थ और समृद्ध जीवन जी सकें। इसलिए, वास्तु शास्त्र का हमारे जीवन पर प्रभाव हो सकता है, हालांकि इसके लिए व्यक्तिगत अनुभव की आवश्यकता है।





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