December 02, 2023


शिवराज और भूपेश जीत रहे हैं,मोदी हार रहें...


नई दिल्ली । रमेश कुमार 'रिपु'। हाफती राजनीति को जनता के साथ का ग्लूकान डी चाहिए। क्यों कि राजनीति बगैर सत्ता के नहीं चलती। चुनाव हमेशा विचार धाराओं की लड़ाई का आधार नहीं बनते। जनता तय करती है, कि वो किस पार्टी की सरकार अपने राज्य में चाहती है। इस बार पांच राज्यों के चुनावी नतीजे के रूझान हैरान करते हैं। खासकर मध्यप्रदेश का। विभिन्न चैनलों के नतीजे बता रहे हैं कि मध्यप्रदेश में भाजपा की और छत्तीसगढ़ में भूपेश की सरकार बन रही है। यदि ऐसा होता है तो यही माना जाएगा कि शिवराज और भूपेश चुनाव जीत रहें हैं और मोदी हार रहें हैं। राजस्थान में सियासी रिवाज बदलने के आसार हैं। तेलंगाना में बीजेपी का वजूद खतरे में हैं।

अमित शाह और मोदी यही मानकर चल रहे थे कि मध्यप्रदेश उनके हाथ से निकल गया। शिवराज सिंह चौहान को उस समय बड़ा धक्का लगा, जब प्रथम सूची और दूसरी सूची में भी उनका नाम नहीं था। विपक्ष भी यह मान लिया था,कि शिवराज सिंह चौहान को भाजपा हाईकमान टिकट नहीं देना चाहता। विवश होकर शिवराज सिंह ने मतदाताओं के समक्ष में कहा, कि बताओ बहनों तुम्हारे भाई को चुनाव लड़ना चाहिए कि नहीं। अमितशाह न चाहते हुए भी शिवराज सिंह चौहान को प्रत्याशी बनाया।


शिवराज को अकेला छोड़ा..

मोदी और अमितशाह ने शिवराज सिंह चौहान को मध्यप्रदेश में अकेला छोड़ दिये थे। इनके समानांतर कई नेता खड़े कर दिये। वीडी शर्मा,कैलाश विजय वर्गीय,प्रहलाद पटेल,फग्गन सिंह कुलस्ते और नरेन्द्र सिंह तोमर। तीन केन्द्रीय मंत्री और चार सांसदों को विधान सभा चुनाव का टिकट दिया गया। यह सब शिवराज सिंह चौहान की घेराबंदी के लिए भाजपा हाई कमान ने ऐसा किया। वहीं सबसे कैंपेन मोदी ने मध्यप्रदेश में किया। शिवराज की विनम्रता और उनकी लाड़ली बहना योजना का ही जादू है कि मतदान में महिलाओं की लंबी -लंबी कतारें देखी गयी। यह कह सकते हैं, कि एम पी में कांग्रेस पिछड़ रही है और बीजेपी बढ़ रही है। अमितशाह ने चुनाव से पहले आखिरी बार सर्वे कराया था, जिसमें यह नतीजा निकला था कि बीजेपी हार रही है। 80-85 सीट में सिमट रही है। अब चुनावी रूझान में यह स्थिति कांग्रेस की है।


विनम्र नेता चाहिए..

चुनावी रूझान से यही तथ्य निकलता है कि जनता विनम्रता पंसद करती है। न कि अहंकारी नेता। कमलनाथ जीत के जहाज में उढ़ने लगे थे चुनाव से पहले ही। इंडिया एलाइंस की बैठक भोपाल में नही होने दी। बुदेलखंड,चंबल संभाग में सपा कुछ जगह मजबूत है। अखिलेश चाहते थे, कांग्रेस तीन -चार सीट हमें दे दे। लेकिन कमलनाथ ने कहा अखिलेश वखिलेश की जरूरत नहीं है। जाहिर सी बात है कि यदि मोदी की छवि पर बीजेपी मध्यप्रदेश में चुनाव लड़ती तो शायद ही चुनावी नतीजे के रूझान के करीब पहुंचती।


नरैटिव सेट तो नहीं..

चुनावी नतीजे के रूझान के पीछे नरैटिव सेट करने के मकसद नहीं है तो शिवराज सिंह पांचवी बार मुख्यमंत्री बन सकते है। उनका पाचवी बार मुख्यमंत्री बनना अमित शाह और मोदी की सियासी प्रत्यंचा की डोर ढीली भी पड़ सकती है। संघ शिवराज को लोकसभा चुनाव में आगे करने की सोच सकता है। इसलिए कि ओबीसी खेमे से आते हैं। और बीजेपी के लिए वो बड़ा चेहरा साबित हो सकते हैं।


गुजरात लाॅबी का दबदबा..

गौरतलब है कि गुजरात लाॅबी ने शिवराज के हाथ से रिमोट छीन लिया था। गुजरात लाॅबी के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है। क्यों कि जन आशीर्वाद यात्रा का नेतृत्व 2018 के चुनाव में शिवराज सिंह चौहान ने किया था। लेकिन इस बार वे जन आशीर्वाद यात्रा का चेहरा नहीं थे। न ही मुख्यमंत्री का चेहरा उन्हें बीजेपी ने बनाया। सवाल यह है कि क्या लाड़ली बहना योजना से बहनों का जीवन बदल गया। उसी की वजह से भाजपा मध्यप्रदेश में जीत रही है। कांग्रेस का आरोप था, कि शिवराज में ढाई सौ घोटाले हुए हैं। चुनाव में बकायदा पाम्पेलट भी हर विधान सभा में बंटे। इसका यही मतलब होता है, कि जनता शिवराज में हुए घोटालों को बहुत गंभीरता से नहीं लिया। मोदी मैजिक का असर मध्यप्रदेश में नहीं चला।यदि मध्यप्रदेश में बीजेपी की सरकार पांचवी बार भी बनती है तो शिवराज भाजपा के लिए एक नया और असरदायक,दमदार चेहरा के रूप में माने जा सकते हैं। यह अलग बात है कि कमलनाथ कहते हैं कि टेलीविजन से प्रदेश नहीं चलता, विजन से चलता से है। वैसे गोदी मीडिया के चैनलों पर अब जनता भरोसा नहीं करती।


छग में भूपेश बनाम मोदी..

छत्तीसगढ़ में भूपेश बनाम मोदी के बीच चुनाव था।डाॅ रमन सिंह पर्दे से बाहर थे। यहां ईडी,आई टी और सीबीआई चुनाव लड़ रही थी। मोदी ने यहां तक कह दिया था,कि भूपेश चुनाव हार रहे हैं। मोदी ने अपनी गारंटी एम पी,छग और राजस्थान से लेकर तेलंगाना तक में जनता को बताया। मगर उनकी गारंटी पर भरोसा जनता ने किया या नहीं कल पता चलेगा। छत्तीसगढ़ में भूपेश की जनकल्याणकारी योजना का लाभ उन्हें मिलने की संभावना है। खासकर आदिवासी और किसानों का। जनता को भूपेश पर भरोसा है न कि मोदी की गारंटी पर चुनावी नतीजे के रूझान यही बताते हैं।


राजस्थान में कांटे की टक्कर..

राजस्थान में मोदी अमितशाह ने वसुंधरा को किनारे कर दिया था। उन्हें कोई तवज्जो नहीं दिया। राजेश पायलट और अशोक गहलोत के बीच चुनाव के पहले तक छत्तीस का सियासी रिश्ता रहा। जिसका लाभ बीजेपी उठाने का पूरा प्रयास की। लेकिन इस बार का चुनाव बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है। देखना है कि राजस्थान अपना सियासी रिवाज बदलता है कि नहीं। वैसे गहलोत की योजनाओं की तारीफ करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी पार्टी की सरकार बनने पर गहलोत की योजनाओं को बंद नहीं किया जाएगा। यह माना जा रहा है कि गहलोत की जन कल्याणकारी योजनाएं इस बार सियासी रिवाज को कायम नहीं रखेगा।

तेलंगाना में बीजेपी का वजूद खतरे में है। यहां काग्रेस की सरकार बनती दिख रही है। यानी दो राज्यो में कांग्रेस और दो राज्यों बीजेपी की सरकार। मिजोरम में त्रिशंकू की स्थिति है। चुनावी नतीजे के रूझान यदि सच साबित होते हैं तो यह मानकर चलिए कि देश के सियासी कैनवास पर 2024 में तस्वीर बदल सकती है। मध्यप्रदेश में शिवराज और छत्तीसगढ़ में भूपेश जीत रहे हैं। जाहिर सी बात है कि मोदी हार रहे हैं। मोदी मैजिक फीका हो गया है। ऐसे में गुजरात लाॅबी पर संघ नकेल कस सकता है। वैसे संघ कह चुका है कि मोदी के सहारे चुनाव नहीं जीता जा सकता।






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